Chandrayan-2 की कहानी । भारत का पहला स्वदेशी Mission Chandrayan- 2

Chandrayan- 2
ISRO द्वारा श्री हरि कोटा से Chandrayan- 2 को 15 July 2019 को 2 बजकर 51 मे Mission Chandrayan-2 को रवाना किया जाने वाला था।
पर कुछ तकनीकी खराबी होने के वजह से इसे राध कर दिया गया पर सारी तकनीकी खरबियो को सुलझाने के बाद ISRO ने 22 July 2019 को 02:43 अपराह Chandrayan-2 को श्री हरि कोटा से Chandrayan- 2 को रवाना किया।
आपके जानकारी के लिए आपको बता दे की भारत ने Chandrayan- 1 को चाँद पर भेजा था। जो 14 November 2008 को चाँद के सतह पर उतरा था और Chandrayan- 1 Mission के सफल होने के साथ ही भारत चाँद पर अपने देश का झंडा लहराने वाले देशों की सूची मे शामिल हो गया।
आपको बता दे की भारत चाँद पर अपना झंडा फहराने वाला चौथा देश है ।
Chandrayan- 2 History
12 November 2007 सोमवार को ISRO और रूसी अन्तरिक्ष एजेंसी के बीच Chandrayan- 2 Mission पर साथ मिलकर काम करने का समझोता हुआ, और 18 September 2008 को भारत सरकार द्वारा इस मिशन को स्वीकृती मिल गई।
हालकि Chandrayan- 2 Mission को 2013 मे रोक दिया गया और 2016 मे इसे फिर से शुरू किया गया।
आपको बता दे की Chandrayan- 2 Mission मे इतना वक्त इसलिए लगा क्योंकि रूस को Chandrayan- 2 मे जो Lander लगाया जाने वाला था, रूस उस लैंडर को सही वक्त पर बनाने मे विफल रहा और रूस से Chandrayan- 2 Lander बनाने का ही समझोता हुआ था।
रूस द्वारा मंगल ग्रह पर भेजे गए मिशन भेजे फोबोस ग्रांट मे मिली विफलता के कारण भारत ने रूस को अपने मिशन Chandrayan- 2 से अलग कर दिया गया।
Vikram Lander बनाने की जिम्मेदारी IIT KANPUR को सौप दिया गया।
Chandrayan- 2 Design
ये हमारे देश के लिए गर्व की बात है की Chandrayan- 2 का पूरा डिजाइन भारत मे ही बनाया गया।
हालकि Chandrayan- 2 Lander का डिजाइन रूस को बनाए के लिए दिया गया था पर रूस को बाद मे इस प्रोजेक्ट से अलग कर दिया गया और Chandrayan- 2 की सारी डिजाइनिंग भारत मे ही की गई।
Chandrayan- 2 Speciality ( विशेषता)
1. चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र पर एक Soft लैंडिंग का संचालन करने वाला पहला अंतरिक्ष मिशन हैं।
2. पहला भारतीय मिशन, जो घरेलू तकनीक के साथ चंद्र सतह पर एक soft लैंडिंग का प्रयास करेगा।
3. पहला भारतीय मिशन, जो घरेलू तकनीक के साथ चंद्र क्षेत्र का पता लगाने का प्रयास करेगा।
4. 4th देश जो चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा।
Chandrayan- 2 Orbital

ऑर्बिटर 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर चन्द्रमा की परिक्रमा करेगा। Orbital का वजन 1400 किलों होगा उरान के समय।
आपको बता दे की जब Orbital , Lander से अलग होगा तो ये वह की उन्नत किश्म की तस्वीरे हमे भेजेगा। Orbital का 7 साल तक अन्तरिक्ष से हमे जानकारी प्रदान करेगा।
Chandrayan- 2 Lander

चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। यह एक चंद्र दिन के लिए कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो लगभग 14 पृथ्वी दिनों के बराबर है।
आपको बता दे की लैंडर तथा रोवर का वजन 1250 किलोग्राम है। लैंडर मे इतनी हाइ टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है की वो खुद आपने आप को operate कर सकता है। मान लीजिए अगर किसी कम्युनिकेशन प्रॉब्लम के वजह से अगर हमारा संपर्क लैंडर से छु जाता है तो ये खुद अपने इंजन पर कंट्रोल कर सकता है।
साथ ही साथ आपको ये भी बता दे की Vikram Lander का नाम ISRO के चीफ डॉ विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है। यह एक दिन मे काम करने वाला लैंडर हाई इसके मतलब इसका कार्य काल 14 दिन का है। इसका मतलब ये नही की विक्रम लैंडर सिर्फ 14 दिनो तक ही काम करेगा इसका मतलब ये हाई की जब तक चाँद पर सूर्य की किरणे लैंडर पर परेगी ये काम करेगा जैसे ही सूर्य की किरणे लैंडर पर परना बंद हो जाएगी ये काम करना बंद कर देगा। और जब फिर 14 रात्रि बाद 14 दिन के लिए सूर्य की किरणे इस पर परेगी ये फिर से काम करना शुरू कर देगा।
विक्रम लैंडर को इस तरह से डिजाइन किया गया है की Orbital से अलग होने के बाद ये चाँद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर सके। जिससे की इसके अंदर रखे रोबर और लैंडर को कोई नुकसान न पहुचे।
Pragyan Rover

लैंडर जैसे ही चाँद पर उतरेगा उसके बाद Pragyan Rover का काम शुरू होगा। प्रज्ञान रोवर का वजन 27 किलो का है जिसमे 6 पहिये है। प्रज्ञान रोवर सोर ऊर्जा से चलेगा यह 500 M तक यत्रा कर सकता है। प्रज्ञान रोवर चाँद की सतह का विश्लेषण करेगा और जानकारी एकत्रित करेगा। प्रज्ञान रोवर अपने द्वारा किये गए विशलेशन को Lander तक पहुचायेगा और Lander उन Deta को Orbital तक पहुचायेगा जो की चांद की सतह से 100 km की उचायी पर परिकरमा करेगा और Orbital उन Deta को हमारे ISRO तक पहुचायेगा।
प्रारंभिक योजना में रोवर को रूस में डिजाइन और भारत में निर्मित किया जाना था। हालांकि, रूस ने मई 2010 को रोवर को डिजाइन करने से मना कर दिया। इसके बाद, इसरो ने रोवर के डिजाइन और निर्माण खुद करने का फैसला किया। आईआईटी कानपुर ने गतिशीलता प्रदान करने के लिए रोवर के तीन उप प्रणालियों विकसित की:
- त्रिविम कैमरा आधारित 3डी दृष्टि - जमीन टीम को रोवर नियंत्रित के लिए रोवर के आसपास के इलाके की एक 3डी दृश्य को प्रदान करेगा।
- काइनेटिक कर्षण नियंत्रण - इसके द्वारा रोवर को चन्द्रमा की सतह पर चलने में सहायक होगा और अपने छह पहियों पर स्वतंत्र से काम करने की क्षमता प्रदान होगी।
- नियंत्रण और मोटर गतिशीलता - रोवर के छह पहियों होंगे,प्रत्येक स्वतंत्र बिजली की मोटर के द्वारा संचालित होंगे। इसके चार पहिए स्वतंत्र स्टीयरिंग में सक्षम होंगे। कुल 10 बिजली की मोटरों कर्षण और स्टीयरिंग के लिए इस्तेमाल कि जाएगी।
Poland
जब सरवात मे ISRO Chandrayan- 2 Mission पर काम कर रहे थे तो कहा जा रहा था की Chandrayan- 2 के साथ Orbital पर 5 तथा Rover पर 2 Poland भेजे जाएंगे जिसमे की NASA का भी पोलैंड रहेगा । पर ISRO ने विदेशी Poland ले जाने से साफ इंकार कर दिया और Chandrayan- 2 Mission पर सिर्फ ISRO के ही Poland है। जो सिर्फ भारत के लिए ही काम करेगा।
आप निचे देख सकते है की Chandrayan- 2 के साथ कितने Poland भेजे गए है।
Orbital Poland
आपको बता दे की ISRO ने Orbital के साथ कुल 5 Poland bheje hai।
Lander Poland
लैंडर के साथ ISRO ने कुल 4 poland भेजे है।
- रेडियो प्रच्छादन
- प्रयोगलॉंगमोर
- प्रोबथर्मल
- प्रोबसेइसमोमीटर
Rover Poland
रोवर के साथ ISRO ने 2 Poland भेजे है।
- PRL, अहमदाबाद से अल्फा पार्टिकल इंड्यूस्ड एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोप (APIXS).
- लेबोरेट्री फॉर इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम्स (LEOS), बंगलौर से लेजर इंड्यूस्ड ब्रेकडाउन स्पेक्ट्रोस्कोप (LIBS).
"आशा करता हू दोस्तो आपके लिए ये जानकारी helpful रही होगी "
आपका आर्टिकल बहुत अच्छा है
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